गीतासार

अध्याय ९ · श्लोक १८

गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्।
प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम्।।९.१८।।

Transliteration

gatir bhartā prabhuḥ sākṣhī nivāsaḥ śharaṇaṁ suhṛit
prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṁ nidhānaṁ bījam avyayam

अर्थ

क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

Meaning

I am the goal, the sustainer, the Lord, the witness, the home, the shelter, the lover, and the origin; I am life and death; I am the fountain and the imperishable seed.